Amit Verma

Just another weblog

8 Posts

68 comments

अमित वर्मा


Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.

Sort by:

वाह रे एक अतिसुधारवादी समाज:

Posted On: 14 Jul, 2012  
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (8 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

Others न्यूज़ बर्थ लोकल टिकेट में

17 Comments

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा:

सुन्दर अभिव्यक्ति खालिश साहित्य एवं दर्शन युक्त विचार...वैसे सपनो की राजकुमारियां ज्यादातर जीवन को प्रकृति से दूर करने और एक तरह की विक्षिप्तिता का प्रादुर्भाव ही करती है, स्वयं को भूलकर हम उसमे बसने लगते है, और एक दिन वह हमारे उस आसियाने को नष्ट कर देती है, या यूं कह ले मकान मालिक और किरायेदार का रिस्ता...किन्तु हम उस घर के मालिक बन बैठने की गफ़लत में अपने घर से भी बेदखल हो जाते है...कैसी विडम्बना है यह प्रेम में...शायद तभी सूफ़ियों ने उस ऊपर वाले से इश्क कर लिया...जहां कोई उपेक्षा, अपेक्षा, मान-अभिमान, जैसी मानवीय भावनाये धूमिल हो जाती है बचता है तो सिर्फ़ निरपेख्श प्रेम...और अप्ने भीतर उसके होने का बोध...बस इतना ही...कृष्ण

के द्वारा:

आप इतने ज्ञानी हैं फिर भी ऐसा सोचते हैं......कारण क्या है पता है...आपने उसी व्यवस्था उसी संस्कृति का अनुशरण किया है जो अँगरेज़ बना कर गए हैं........मैंने ऐसा नहीं कहा कि मैं कुछ नहीं करूँगा......मैं कुछ नहीं करना चाहता....वर्त्तमान मेरा कर्तव्य है कि मैं भारत स्वाभिमान आन्दोलन के साथ चलूँ.....अपने देशवाशियों को जागरूक करूँ......क्यूँ कि rastrahit के लिए एकता आवश्यक है........ भारत कि विडम्बना यह नहीं है कि यहाँ लोग कुछ नहीं करना चाहते विडम्बना यह है कि सब अपने ढंग से अलग अलग करना चाहते हैं.....इसका जीवंत परिणाम पाकिस्तान है....... एक ऊँगली से मुट्ठी नहीं बन सकती.....पांचों उँगलियों का होना अनिवार्य है...... आवश्यकता है एकता कि.......जिसके लिए हम प्रयासरत हैं..किन्तु आप जैसे लोग नहीं.......अब भी जागिये कहीं आगे आपके आने वाले वन्सजों के लिए अँधेरा न हो जाये.........और एक बात आप स्वामी रामदेव के विषय मैं आप कुछ नहीं जानते इसलिए ऐसा कह रहे हैं..कभी पतंजलि योगपीठ पहुँच कर देखिये कितने असहायों को सहायता मिलती हैं......शायद आप अपरिचित हैं ऐसे भारत से जहाँ ८०% लोग भूखे सो जाते हैं.....उनके दर्द को महसूस कीजिये......निश्चित हैं आप भी बदल जायेंगे........ प्रीतीश

के द्वारा: pritish1 pritish1

के द्वारा: jagojagobharat jagojagobharat

अमित जी, बहुत ही सटीक लेख है आपका [अचानक सामाजिक मूल्यों की दुहाई देकर अपनी छाती पीट रहे समाज का अचानक से आये इस परिवर्तन से वाकई मस्तिष्क का चकराना स्वभाविक है. वही मिडिया जो सनी लियोन, पूनम पाण्डेय इत्यादि को भारत की बहुत बड़ी विरासत दर्शाता है और उन्ही की तरह ही एक महिलाओ के खुलेपन (?) के पक्ष में महिला आयोग (जी हा आप सही समझे, ये वही संसथान है जो रोज़ हजारो महिलाओ पर हो रहे अत्याचार पर कुछ नहीं करता मगर मिका अगर राखी सावंत से चुम्बन कांड कर दे तो गिरिजा व्यास खुद संज्ञान लेने पहुच जाती है) से लेकर दुसरे आयोगों के साथ इसकी पैरवी करता रहता है. दोस्तों भारतीय मीडिया पहले तो पूरा दिन आपको जिस्म-2 के ट्रेलर दिखायेगा, पूनम पांडे जितने कम कपडे पहनेगी उतनी ही तारीफ करेगा और वही घटना जब परदे की बजाये सड़क पर हो जाये तो आपके उपर सभ्यता (जो उसने कभी नहीं सिखाई) का लबादा जबरदस्ती ड़ाल देगा...... जब हमारी दिनचर्या में टेलीविजन हमें उकसाने वाले दृश्य दिखाता है टेलीविजन पर अर्धनग्न लड़कियों को देख कर हमारी सोंच कुंठित होने लगती है और हमारी नज़र से हर लड़की गिरने लगती है या हम अपने आप को शरीफ दिखाने के लिए लड़कियों के कपड़ों और उनके कृत्यों में कमियाँ निकालने लगते हैं, उन्हें चरित्रहीन बनाने पर तुल जाते हैं....जबकि सच ये है की हम मानसिक और चारित्रिक रूप से कमज़ोर होते चले जा रहे हैं...इसमें दोष बहुतों का है किसी एक का नहीं

के द्वारा: Anil Kumar "Pandit Sameer Khan" Anil Kumar "Pandit Sameer Khan"

स्वागत के साथ प्रथम ब्लॉग के लिए आभार आपका यह लेख बेहद विश्लेषणात्मक है अपने विचार आपने बहुत अच्छी तरह रखे हैं . एक बात यह कहना अवश्य चाहूंगी की पूर्ण अच्छा समाज कभी ना था.उस वक्त भी नहीं जब एक बालक हरिश्चंद्र बन गया यह इस बात पर निर्भर करता है की समाज के विभिन्न मुद्दों को युवा किस नज़र से देख रहा है .काला चश्मा पहन कर जो युवा ज़िंदगी के मज़े लुटाना चाहते हैं उनकी ज़िंदगी स्याह में डूब रही है.अपनी साफ़ स्पष्ट आँखों से जो युवा ज़िंदगी की राह पर आगे बढ़ रहे हैं उनकी ज़िंदगी उज्जवल बन रही है.युवा आज भी कई अच्छे काम कर रहे हैं विकृत मानसिकता के शिकार कुछ युवा हर देश काल में थे.इन्हें सुधारने के लिए इन पर साम,दाम दंड भेद सभी नीती लागू करनी चाहिए. शेष मेरे अगले ब्लॉग में.

के द्वारा: yamunapathak yamunapathak




latest from jagran